जितना हम जानते हैं, उससे कहीं पुराना है महाभारत

October 20, 2019 by No Comments

बागपत जिले में हुई
खुदाई के दौरान मिले
अवशेषों के आधार पर
एएसआई का दावा

खुदाई के दौरान
मिलीं युद्ध का रथ, एक
जंग लगा धनुष और तीर,
गेरुए रंग के बर्तन, ढाल,
चाबुक, मशाल जैसी
चीजें

नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
(एएसआई) के अधिकारियों ने दावा
किया है कि जितना हम जानते हैं
महाभारत उससे भी पुराना है। जाने-माने
पुरातत्वविद बी. बी. लाल की खोज के
आधार पर अब तक माना जाता रहा कि
महाभारत का काल ९००-१००० ईसा
पूर्व है। लेकिन एएसआई के वरिष्ठ
पुरातत्वविद बताते हैं कि महाभारत का
समय १५००-२००० ईसा पूर्व हो
सकता है। यह दावा पिछले साल यूपी
के सनौली गांव (बागपत जिले) में
खुदाई के दौरान मिले अवशेषों के
आधार पर किया जा रहा है। खुदाई के
दौरान घोड़े द्वारा खींचा जाने वाला युद्ध
का रथ, एक जंग लगा धनुष और तीर,
गेरुए रंग के बर्तन, ढाल, चाबुक,
मशाल जैसी चीजें मिली थीं। शुक्रवार
को एएसआई के इंस्टिट्यूट ऑफ
आर्कियोलॉजी के डायरेक्टर संजय
मंजुल ने बताया कि नए काल का
निर्धारण इन चीजों के आधार पर ही
हुआ है। मंजुल की देखरेख में सनौली
में खुदाई की गई थी। उनका कहना है
कि खुदाई के दौरान मिला युद्ध का रथ
अपनी तरह की पहली खोज है। इससे
सनौली साइट का महाभारत की संस्कृति
से और करीबी ताल्लुक जाहिर होता है।
संजय मंजुल बताते हैं, ‘जो चाबुक हमें
मिला वह घोड़े पर इस्तेमाल किए जाने
वाला है न कि बैल पर। पहिए और
खंभे जैसी चीजें ठोस तांबे से बनी हैं।
सनौली के अवशेष हमारी सभ्यता की
निरंतरता के निशान हैं। उनका कहना
है, ‘२६००-१७०० ईसा पूर्व का
काल (भारतीय उपमहाद्वीय की ताम्र
युग की संस्कृति) अपनी शहरी
संस्कृति, अच्छे हथियारों, धातु के
बर्तनों और वैदिक परंपराओं के लिए
जाना जाता है। हम जानते हैं कि यह
काल काफी हद तक महाभारत काल
से मेल खाता है।
कुरु राजाओं की वंशावली
मंजुल ने कुरु राजाओं की वंशावली
पर भी गौर किया है, जो प्रतिपा से शुरू
होकर धृतराष्ट्र, पांडु और युधिष्ठिर तक
जाती है। ये क्रमश: पांचवें, छठे, सातवें
स्थान पर हैं और ३६वें राजा क्षेमक के
साथ समाप्त होती है। मंजुल ने कहा,
‘बुद्ध का समकालीन लगभग ५५० ईसा
पूर्व था, जो कुरु राजाओं की २३वीं
पीढ़ी थी। अगर, औसतन आप प्रत्येक
राजा को ५० साल देते हैं, जो बाद की
पीढ़ियों में लगातार युद्धों के साथ कम
हो जाता है, तो मान सकते हैं कि
महाभारत काल लगभग १७५० ईसा पूर्व
तक फैला था।’
आधुनिक तकनीकों से जांच
डायरेक्टर संजय मंजुल ने बताया
सनौली के अवशेषों पर काम चल रहा
है। एएसआई की टीम ने कई वैज्ञानिक
तकनीकों जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन, ३
डी स्कैनिंग, और जीपीआर सर्वे का
उपयोग किया है ताकि इसका एकदम
सटीक अनुमान लगाया जा सके।
१९५० के दशक के प्रारंभ में इंद्रप्रस्थ
में पहली खुदाई के बाद से, महाभारत
में वर्णित कम से कम आठ स्थानों पर
खुदाई हुई है, लेकिन एएसआई ने अब
तक ऐतिहासिक तथ्यों को स्थापित करने
के लिए कोई निर्णायक या प्रत्यक्ष सबूत
पब्लिश नहीं किया है।

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