बेटे ही नहीं, बहू-दामाद पर भी देखभाल की जिम्मेदारी

December 5, 2019 by No Comments

नई दिल्ली। घर में अकेले बुजुर्गों की जिम्मेदारी
सिर्फ बेटे ही नहीं, बल्कि बहू-दामाद, सौतेले बच्चों
की भी होगी। सरकार ने बुजुर्गों की देखभाल की
परिभाषा तय करने वाले मेंटिनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ
पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटिजन ऐक्ट २००७ में कुछ
और चीजें शामिल की हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार
को ऐक्ट में यह संशोधन पास किया। नए नियम
में माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल किया
गया है, चाहे वे सिनियर सिटिजन हों या नहीं।
उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते इस बिल को
सदन में पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना
है कि इसमें अधिकतम १० हजार रुपये मेंटिनेंस देने
की सीमा को भी खत्म किया जा सकता है।
देखभाल करने वाले ऐसा करने में विफल होते हैं,
शिकायत करने पर उन्हें ६ महीने कैद की सजा हो
सकती है, जो अभी तीन महीने है। देखभाल की
परिभाषा में भी बदलाव कर इसमें घर और सुरक्षा
भी शामिल किया गया है। देखभाल के लिए तय
की गई राशि का आधार बुजुर्गों, पैरंट्स, बच्चों और
रिश्तेदारों के रहन-सहन के आधार पर किया
जाएगा। प्रस्ताव पास होने की जानकारी देते हुए
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश
जावडेकर ने कहा कि बिल लाने का मकसद बुजुर्गों
का सम्मान सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित बदलावों
में देखभाल करने वालों में गोद लिए गए बच्चे,
सौतेले बेटे और बेटियों को भी शामिल किया गया
है। संशोधन में ‘सीनियर सिटीजन केयर होम्स’ के
पंजीकरण का प्रावधान है और केंद्र सरकार स्थापना,
संचालन और रखरखाव के लिए न्यूनतम मानक
निर्धारित करेगी। विधेयक के मसौदे में ‘होम केयर
सर्विसेज’ प्रदान करने वाली एजेंसियों को पंजीकृत
करने का प्रस्ताव है। बुजुर्गों तक पहुंच बनाने के
लिए प्रत्येक पुलिस ऑफिसर को एक नोडल
ऑफिसर नियुक्त करना होगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *