एमएसएमई नीति के खिलाफ एकजुट हुए उद्यमी

November 20, 2019 by No Comments

वाराणसी। सरकार की प्रस्तावित
एमएसएमई नीति ने उद्यमियों को
सदमे में डाल दिया है। इसको
लेकर मंगलवार को सभी उद्यमी
एकजुट हुए इस नीति का पुरजोर
विरोध किया और कहा कि
२००६ की एमएसएमई नीति को
पहले पूरी तरह से क्रियान्वित करें
इसके बाद नए एक्ट को लागू
करें। क्योंकि नई नीति में सरकार
की मंशा क्या है, उद्यमियों व
उद्योग के हित में होगा की नहीं
इसको लेकर संशय बरकरार है।
पहले सरकार नई प्रस्तावित नीा-
fत से सभी को अवगत कराए फिर
इसको लागू करें। छोटे, लघु व
मध्यम उद्योगों को मंदी से उबारने
के लिए भारत सरकार सूक्ष्म,
लघु एवं मध्यम उद्योगों की
परिभाषा में बदलाव करने जा रही
है। इसके तहत ५ करोड रूपए
तक के उद्योग सूक्ष्म में, इससे
उपर लघु और ७५ करोड से
अधिक वाले उद्योग को मध्यम
श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है।
इसको लोकसभा व राज्यसभा के
शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया
जाएगा। सरकार की इस
प्रस्तावित नीति को लेकर
मलदहिया स्थित विनायक प्लाजा
में कई उद्यमी एकजुट हुए और
सरकार के इस प्रस्तावित नीति
को लेकर घंटों मंथन हुआ इसके
बाद न सिर्फ खारिज किया
बल्कि कहा कि पहले सरकार
उद्यमियों को नए नीति के बारे में
बताए और साथ में बैठक करें।
सभी उद्यमियों को यह समझ में
आ जाए कि इससे उद्योगों को
कितना फायदा होगा तभी इसे
लागू करें।
टर्नओवर नहीं इन्वेस्ट बेस ही
लागू करें सरकार। आईआईए के
उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा
कि सरकार वास्तव में उद्योग
प्रदेश बनाना चाह रही है तो सबसे
पहले उद्यमियों की पीडा को दूर करें।
जीएसटी को लागू हुए २८ महीने का
समय बीत गया लेकिन अभी तक
जीएसटी की विसंगतियों के जाल
से कोई भी उद्यमी उबर नहीं पाया।
उद्योगों को संजीवनी देने के लिए सरकार
ने कई योजनाएं लागू कि इनमें
विद्युत दरों में छूट से लेकर कई
सारी योजनाएं लागू की गयी
लेकिन कोई भी योजनाएं
फलीभूत नहीं हो पायी। लिहाजा
उद्यमियों की छोटी-छोटी समस्याएं
आज विकराल हो गयी। सभी
समस्याओं को दूर करने के लिए
उद्यमियों ने एक बार नहीं बल्कि
कई फोरम पर रखा लेकिन दूर
होने की बजाय नासूर बनती गयी।
यही वजह है कि आज उद्यमी
एमएसएमई की प्रस्तावित नीति को
लेकर सदमे में है।
बैठक में डिवीजनल चेयरमैन
राजेश भाटिया ने कहा कि रिफंड
की समस्या विकराल हो गयी है।
दीपक बजाज ने कहा कि जीएसटी
रिफंड के लिए हमेशा पोर्टल ही
खराब रहता है। श्रीबदलानी ने
कहा कि लेबर एक्ट में सरकार
बदलाव करें इसके बाद नयी
नीति को लागू करें। बैठक में सभी
सरकार प्रस्तावित नीति का विरोध
किया और सुझाव से संबंधित पत्र
सरकार के फोरम में रखने के लिए
सभी से एकजुट होने का आहवान
किया। बैठक में नीरज पारिख,
राहुल मेहता, अनुज डिडवानिया,
दीपक बजाज, राजकुमार शर्मा,
यूआर सिंह समेत कई उद्यमियों ने
कहा कि नयी नीति को लेकर
उद्यमी चुप बैठने वाले नहीं है।

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